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पटना में कचरा प्रबंधन में हाईटेक क्रांति: 53 करोड़ से बनाए जा रहे आधुनिक गार्बेज ट्रांसफर स्टेशन

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राजधानी की सड़कों से कचरे के ढेर और बदबू की समस्या अब धीरे-धीरे अतीत बनने की ओर बढ़ रही है। पटना को साफ-सुथरा और व्यवस्थित बनाने के लिए नगर निगम ने ठोस कचरा प्रबंधन व्यवस्था को पूरी तरह हाईटेक बनाने की दिशा में अब तक की सबसे बड़ी योजना पर तेजी से काम शुरू कर दिया है। इस पहल के तहत शहर के सभी अंचलों में अत्याधुनिक गार्बेज ट्रांसफर स्टेशन (जीटीएस) बनाए जा रहे हैं, जिन पर करीब 53 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। नगर प्रशासन का दावा है कि यह परियोजना राजधानी को स्मार्ट सिटी मॉडल के अनुरूप आधुनिक स्वच्छता प्रणाली देने में निर्णायक साबित होगी।नई व्यवस्था लागू होने के बाद कचरा प्रबंधन केवल कूड़ा उठाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका वैज्ञानिक तरीके से संग्रहण, मापन और प्रोसेसिंग भी सुनिश्चित की जाएगी। प्रस्तावित गार्बेज ट्रांसफर स्टेशनों में विशाल शेड, ड्रेनेज नेटवर्क, धर्मकांटा, गार्ड रूम और स्वच्छता सुविधाएं विकसित की जा रही हैं, जिससे हर दिन शहर में आने वाले कचरे की सटीक निगरानी हो सकेगी। इससे अनियंत्रित कचरा ढेर और खुले में कूड़ा जमा होने की समस्या पर प्रभावी नियंत्रण संभव होगा।तकनीकी स्तर पर इन केंद्रों को आधुनिक मशीनों से लैस किया जा रहा है। यहां कॉम्पैक्टर यूनिट, हुक लोडर और कैप्सूल कंटेनर लगाए जाएंगे, जिनकी मदद से कचरे को तेजी से संकुचित कर सुरक्षित तरीके से अंतिम प्रोसेसिंग स्थलों तक पहुंचाया जा सकेगा। लगातार संचालन के लिए डीजी सेट की व्यवस्था भी की जा रही है, ताकि बिजली बाधित होने पर भी कार्य प्रभावित न हो। इस प्रणाली से कचरा उठाने की प्रक्रिया तेज होगी और शहर में सफाई व्यवस्था अधिक प्रभावी बनेगी।परियोजना के तहत अलग-अलग अंचलों में निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। पटना सिटी क्षेत्र में सबसे अधिक राशि खर्च की जा रही है, जबकि बांकीपुर और पाटलिपुत्र सर्किल में भी निर्माण कार्य अंतिम चरण में पहुंच रहा है। यारपुर स्थित केंद्र का अधिकांश निर्माण पूरा हो चुका है और जल्द ही वहां मशीनों की स्थापना शुरू होने वाली है। इन स्टेशनों के चालू होते ही पुराने कचरा संग्रहण स्थलों को स्थानांतरित कर दिया जाएगा, जिससे खुले में कचरा जमा होने की समस्या समाप्त हो सकेगी।नई व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा आसपास के इलाकों में रहने वाले लोगों को मिलेगा, क्योंकि स्टेशनों को इस तरह डिजाइन किया गया है कि कचरे से निकलने वाला गंदा पानी सीधे ड्रेनेज प्रणाली में चला जाए और दुर्गंध बाहर न फैले। इससे न केवल लोगों को राहत मिलेगी, बल्कि शहर की स्वच्छता रैंकिंग में भी सुधार की संभावना है। नगर निगम का मानना है कि यह परियोजना राजधानी को साफ, आधुनिक और रहने योग्य बनाने की दिशा में एक बड़ा बदलाव साबित होगी और आने वाले वर्षों में शहरी कचरा प्रबंधन के लिए एक मॉडल के रूप में स्थापित हो सकती 

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